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Saturday, October 22, 2011

love is canvas furnished by nature.......


love is canvas furnished by nature
love filled life is full of lustre
mother starts loving the child one's she conceive
it is most sacred love i believe
baby develops and love strengthens
father and mother's love for baby sweetens
child comes on earth after birth nextly
Love from all relations flows accordingly
brother and sister love is known to all
it is love filled with naughtiness and care wrapped shawl
when u meet your dream mate
love together with care, trust and happinesss begins to accelerate
compassionate love begins to generate
then feelings are so sensate
passionate love innate
then begins the wait for marriage date
love for husband and wife is beautiful
life after marriage becomes colourful and cheerful
naugtiness, care and romance sprinkle
time makes u old but heart filled with love always shine like gold
caring hands are there for one to hold
imagination and commitment at every phase makes love deeper
love is canvas furnished by nature
love filled life is full of lustre

Tuesday, August 16, 2011

बड़ी खुशनसीब हूँ मैं.....

बड़ी खुशनसीब हूँ मैं ,
जो मिला है एक ऐसे साथी का साथ....
जो समझे मेरी दिल की हर बात,
कद्र करता है हर जस्बात
जो चाहता उसका साथी चले उसके साथ
बहुत ही ऊचे है इनके ख्यालात ......
मन करता करू इनसे हर दिल की बात 
बातों ही बातों में बीत जाते कहीं घंटे साथ
ख्यालों में रहते बस येही चाहे दिन हो या रात
हर बात को कहने का बहुत ही अलग अंदाज़
साथ इनका  बढाता मेरा मनोबल और आत्मविश्वास
इनका साथ ही है मेरी आजकल हर पल मुस्कराहट का राज़
ज़िन्दगी की बारीकियों का अनुभव इन्हें ख़ास
हर अदा पर इनकी हम करते है नाज़
सच होगा  इनका हर सपना मन में है विश्वास
सूरज सी रोशनी फैलेगी इनकी ,करेगे हर दिल पर राज़
भगवान् बचाए बुरी नज़र से , होगा सिर इनके बुलंदियों का ताज.....

Friday, August 12, 2011

जीवन में आया नया दौर......

जीवन में आया नया दौर,
ख़ुशी से चल पड़ी मैं उस ओर,
नए नए रिश्ते,
बन कर आये जीवन में फ़रिश्ते,
बड़ो का आशीर्वाद, बच्चो का प्यार,
बड़ी खुशनसीब हूँ मैं जो मिला इतना दुलार,
दादाजी का आशीष भरा सिर पर हाथ,
बनकर आया जीवन का वरदान,
पापाजी, मम्मीजी की सादगी और अपनापन,
विपुल भैया का शर्मीलापन और भोलापन,
जीजाजी की सादगी में मस्तिपन,
मोना दीदी की ढेर सारी बातें,
सिखा गयी क्या होते हैं रिश्ते नाते.......
जीवन में आया नया दौर,
ख़ुशी से चल पड़ी मैं उस ओर.......
चाचा , चाची की आँखों में पाया ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद,
जो की हमेशा रहेगा मुझे याद,
प्रियंका की शरारती हंसाने वाली अदा,
पर हम हो गए पूरी तरह फ़िदा,
खुशबु की मीठी-मीठी प्यारी- प्यारी बात,
याद रहती है मुझे दिन रात,
मामी कहना अर्णव का तुतलाकर,
इस प्यारे क्षण ने सिखा दिया,
की अब में बड़ी हो गयी हूँ,
इन सब अनमोल रिश्तो को अपनाके....
जीवन में आया नया दौर,
ख़ुशी से चल पड़ी मैं उस ओर........
सचिन- आकांक्षा का साथ है ऐसा 
जैसे दिल और धड़कन,
शब्द भी कम पड़ जायेगे,
अगर करने लगू वर्णन,
जीवन में आया नया दौर,
ख़ुशी से चल पड़ी मैं उस ओर,
औरो को अभी मैं ज्यादा जान नहीं पायी,
लेकिन विश्वास है जितना जनूगी,
पाऊँगी क्या होती है रिश्तों की गहराई,
भगवान् से बस यही है प्रार्थना,
संजो कर रख पाऊ इन अनमोल रिश्तों का खज़ाना............
जीवन में आया नया दौर,
ख़ुशी से चल पड़ी मैं उस ओर......

एक है लड़का......


एक है लड़का                                                     
एकदम निराला
अपनी धुन में रहता है
सुनता सबकी 
करता मन की
हमेशा हँसता रहता है
आगे बढ़ने की चाह
कुछ कर दिखाने का जज्बा
सूरज सी रौशनी फैलाने की लगन 
आगे बढ़ते जाने का मन
मन का कोमल
वाक् पटुता
एक है लड़का 
एकदम निराला 
अपनी धुन में रहता है
सीधा सादा
मधुर व्यवहार
मीठी बोली
खुद पर विश्वास
एक है लड़का 
एकदम निराला 
अपनी धुन में रहता है
मदद करता सबकी
लेकिन कभी व्यक्त ना करता
जब कोई पूछे ,
बन जाता अनजान
दोस्तों संग मस्ती
बच्चों  संग बचपना
बड़ो संग गहरी बातें
अनगिनत गुणों की खान
एक है लड़का 
एकदम निराला 
अपनी धुन में रहता है
अपने को खुशकिस्मत समझू
जो आया मेरी जिंदगी में
ऐसा इंसान
खूब  उचाई पर ये पहुचे
पूरा हो इसका हर एक अरमान
एक है लड़का 
एकदम निराला 
अपनी धुन में रहता है....

Tuesday, August 9, 2011

जब से मिला है साथ आपका , मुझको कविता लिखना आ गया है.....







जब से मिला है साथ आपका ,
मुझको कविता लिखना आ गया है......
कलम को अपनी मुझे,
एक नयी दिशा में चलाना आ गया है....
कभी गंभीर कभी चुलबुलापन,
हँसना-हँसाना,रूठना- मनाना,
का मतलब समझ में आ गया है....
जब से मिला है साथ आपका ,
मुझको कविता लिखना आ गया है......
जिम्मेदारियां अनेक,कुछ रिश्ते विशेष,
की कसौटी से है गुजरना.......
ये समझ में आ गया है.......
जब से मिला है साथ आपका ,
मुझको कविता लिखना आ गया है......
दो परिवारों बीच पुल बनकर,
हँसते हँसते है रहना,
ये अहसास हो गया है......
जब से मिला है साथ आपका ,
मुझको कविता लिखना आ गया है......
घर और बाहरी दुनिया के बीच,
संतुलन है बिठाना,
ये भी समझ में आ गया है..........
जब से मिला है साथ आपका ,
मुझको कविता लिखना आ गया है....
बच्चों संग बच्चा, बड़ों संग बड़ा,
बनकर है रहना,
ये दिलोदिमाग पर छा गया है......
जब से मिला है साथ आपका ,
मुझको कविता लिखना आ गया है....
'आप' की उम्मीदों और विश्वास पर,
है खरा उतरना,
ये ख्याल मन में छा गया है.......
जब से मिला है साथ आपका ,
मुझको कविता लिखना आ गया है....:

Monday, August 8, 2011

कुछ पल याद आते हैं, चेहरे पर हंसी छोड़ जाते हैं!

कुछ पल याद आते हैं,
चेहरे पर हंसी छोड़ जाते हैं!
जब पहली बार हम मिले,
सब थे घेरे खड़े,
हम दोनों की हालत अजीब,
सोच रहे थे क्या सच में जागा है नसीब,
नज़रे थी झुकी-झुकी,
चाहकर भी उठ ना सकी,
चेहरे पर पसीना,
हालत वो भी क्या थी अजीब........
कुछ पल याद आते हैं,
चेहरे पर हंसी छोड़ जाते हैं!
जब हॉल में मैं आई,
सबने एकदम मेरी तरफ टकटकी लगाई,
मन में अजीब ख्याल आया,
क्या किसी लड़की को इन सबने,
पहली बार है देखा,
सोचकर हंसी चेहरे पर आई 
और भाभी की नटखट कानाफूसी से,
डर का मिट गया साया......
कुछ पल याद आते हैं,
चेहरे पर हंसी छोड़ जाते हैं!
जब फोटोग्राफर बोला,
यहाँ पर थोडा धीरे है चलना,
चेहरे पर फिर से हंसी आई,
हमेशा तेज़ कदम रखने वाली लड़की,
की स्पीड में अब गिरावट आई......
कुछ पल याद आते हैं,
चेहरे पर हंसी छोड़ जाते हैं!
नज़रे जो कभी ढूंढे न किसी को,
आज वो भी थी ताक लगाये,
की बस एक झलक मिल जाये.......
कुछ पल याद आते हैं,
चेहरे पर हंसी छोड़ जाते हैं!

ज़िन्दगी के अपने ही रंग होते हैं, अलग अलग रिश्तों के संग होते हैं.....


ज़िन्दगी के अपने ही रंग होते हैं,

अलग अलग रिश्तों के संग होते हैं,
जीवन की कलि खिलती है माँ के आँचल की छाया में,
पापा के  सिर पर प्यार भरे हाथ और दुलार की  साया में,
बाबा, अम्मा का मिलता है प्यार ख़ास,
क्यूंकि मूल से प्यारा होता है ब्याज,
चाचा, चाची का मिलता संग साथ,
जो सिखाता रिश्तों की गहराई साफ़,
भैया के मन में आता, ख़त्म हो गया मेरा एकछत्र राज़,
फिर जैसे जैसे कलि खिलती है, 
भाई-बहिन के प्यार की खुशबू महकती है.....
ज़िन्दगी के अपने ही रंग होते हैं,
अलग अलग रिश्तों के संग होते हैं.......
नाना, नानी की बचपन से सीख और प्यार,
भर देती कलि में संस्कार,
मौसी का प्यार मिलता हरदम,
क्यूंकि अब मौसी का ध्यान रहता ,
इस नन्ही कलि पर हर दम,
बुआ, फूफा का अमिट दुलार,
चह्काता  इस कलि को बार बार.........
ज़िन्दगी के अपने ही रंग होते हैं,
अलग अलग रिश्तों के संग होते हैं.......
धीरे धीरे ये कलि और खिलती है,
नए नए रिश्तों संग मिलती है,
गुरु का होता जीवन में प्रवेश,
इस रंग की अहमियत है विशेष,
ज्ञान का अमृत कलि में बढता है,
जीवन की बारीकियों का पता चलता है......
फिर आते है नए नए दोस्त संग-साथी,
जिनके साथ शुरू हो जाती,
प्रतिस्पर्धा,पढाई,लड़ाई और मौज मस्ती,
धीरे धीरे कलि में रंग बढता है,
ज्ञान रूपी उजाला अज्ञान तिमिर को हरता है........
जब मिल जाये भाभी रूपी दोस्त का साथ,
कलि कैसे न करे अपने ऊपर नाज़,
जीवन में आता जब प्यारा चंचल भतीजा,
कलि की मुस्कराहट का नहीं लगा सकते आप अंदाजा.......
जब मिलती किसी अच्छे सत-गुरु की शरण,
तो  कलि की महक का नहीं हो सकता शब्दों में वर्णन......
ज़िन्दगी के अपने ही रंग होते हैं,
अलग अलग रिश्तों के संग होते हैं.......
धीरे धीरे कलि फूल में बदलती है,
हवा, धूप, बारिश, तूफ़ान में,
अपना अस्तित्व बनाने को तरसती है,
जो फूल सह जाता इन सब का वार,
वो परिपक्व होता और फैलाता खुशबू बेशुमार.....
आते अलग अलग लोग हर रोज,
दे जाते कोई नई सीख ,कोई नई सोच,
ज़िन्दगी के अपने ही रंग होते हैं,
अलग अलग रिश्तों के संग होते हैं.......
ये फूल अब उस पड़ाव पर चलता है,
जब कोई दूसरे  समान फूल से मिलने को तरसता है,
जब आ जाता मन चाहा सम-फूल,
फूल की महक बढ़ जाती भरपूर,
नए नए रिश्तों से होता है मिलन,
सास- ससुर का होता जब जीवन में आगमन,
देवर, नन्द, नंदोई,भांजा बन जाते ख़ास,
फूल को लगता हो जाऊ मैं इनके दिल के पास,
चाचा-चाची ,भाई- बहिन,
बन जाते अटूट बंधन........
ज़िन्दगी के अपने ही रंग होते हैं,
अलग अलग रिश्तों के संग होते हैं.......
जब दो फूल मुस्कुराते साथ साथ,
ये सब रिश्ते बन जाते और ख़ास............
ज़िन्दगी के अपने ही रंग होते हैं,
अलग अलग रिश्तों के संग होते हैं....